Wednesday, October 24, 2012

Fire at Fazilka tehsil office, arson suspected

The records room in the old office of the Fazilka tehsildar caught fire early on Tuesday, gutting all documents stored there. The security staff at the local crime investigation agency (CIA) located opposite the records room noticed the fire in one portion of the old tehsil complex, but  before it could be controlled, documents, including revenue records like mutations and jamabandi, were destroyed.
The police station is 25 metres away and the sub-jail 30 metres from the records room. It took the fire tenders more than an hour to control the blaze.
The police have started an investigation and registered a case against unidentified persons. An official said on condition of anonymity that it was a case of arson.

Captain (retired) MS Bedi questioned how the arsonists could dare to set the records room on fire when it was in the proximity of the CIA and the police station.

Deputy commissioner Basant Garg said the staff of the tehsil office had shifted to a new administrative complex. "We are trying to find out what kind of records were gutted in the fire," he added.

On February 27, 2011, the records room of the court had caught fire. Later, the persons involved in the incident were traced and they confessed that they did so to destroy evidence pertaining to a case that was being heard at that time.

Wednesday, October 17, 2012

सेमिनार :इको कैब के नाम जुड़ी एक और उपलब्धि : रिक्शा चालक खुद को सिपाही समङो : एसएसपी

अमृत सचदेवा, फाजिल्का
ग्रेजुएट वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान में काम कर रही ईको कैब सोसायटी फाजिल्का के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है।
मंगलवार को जिला पुलिस प्रमुख अमर सिंह चहल की अध्यक्षता में ईको कैब (फाजिल्का में ईजाद आधुनिक रिक्शा) की खूबियों, उपलब्धियों बारे एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य वक्ता एसोसिएशन के सचिव इंजीनियर नवदीप असीजा थे। जिसमें जिले के सभी आला पुलिस अधिकारी और सभी थानों के प्रभारी शामिल हुए। सेमिनार को संबोधित करते हुए इंजीनियर असीजा ने प्रदूषण कम करने, बुजुर्गो, महिलाओं व हर शहरवासी को फोन कॉल पर उपलब्ध ईको कैब के फायदों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्बन उत्सर्जन को वैश्विक स्तर पर हुए समझौते के तहत देश के रिक्शा चालक जितनी कार्बन पैदा होने से बचाते हैं, उसकी एवज में उन्हें लाखों रुपये की प्रतिमाह कमाई हो सकती है। इसके अलावा नई रिक्शा इसे चलाने वालों की सेहत के लिए भी फिट है। इंजीनियर असीजा ने सोसायटी द्वारा रिक्शा चालकों के बच्चों की शिक्षा, उनकी नशामुक्ति, परिवार को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में भी बताया। सोसायटी के कार्यो व नेटवर्क से प्रभावित एसएसपी चहल ने रिक्शा चालक से कहा कि वह खुद को रिक्शा पुलर नहीं बल्कि एक सिपाही समङों। वह अपराध रोकने में पुलिस के इंफार्मर बनकर पूरी मदद कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने जिले के हर शहर में ईको कैब सोसायटी की तरह ईको कैब चलाने और रिक्शा चालकों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए उनकी रजिस्ट्रेशन का ऐलान भी किया। इस मौके पर उनके साथ डीएसपी रामप्रकाश, अबोहर के एसपी वरिंद्र सिंह बराड़, जिला यातायात पुलिस प्रभारी हरप्रीत सिंह, फाजिल्का नगर थाना प्रभारी एसएस बराड़, यातायात प्रभारी नरेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

Dainik Jagran, 17 October 2012

Tuesday, October 16, 2012

Jyani announces opening of eye bank at Fazilka

Harish K. Monga

Fazilka, October 15, 2012: It was the third function organised by Social Welfare Society, Fazilka to honour families of eye donors.

So far, the SWC has arranged the eye donations of 177 persons after their death and Fazilka is now known as Eye Donors City.

Padamshree Vijay Kumar Chopra, chief editor, Hind Samachar Group of Papers was the chief guest and Surjeet Kumar Jyani, MLA and Forest and Labour Minister, Punjab, presided over the function.

On this occasion, Nirmla Jyani, Charandev Singh Maan, ADC, Sudesh Nagpal, patron Istri Arya Samaj, Surinder Ahuja, businessman, Dr. S. P. Garg, SMO, civil hospital, Dina Nath Sachdeva, president, Pacca Arthia Association and social worker and various prominent persons of the city and NGOs were present.

The members of the family, who have contributed for donating the eyes on the death of their nearest relatives were honoured by Vijay Kumar Chopra and Surjeet Kumar Jyani and Nirmla Jyani.

Surjeet Kumar Jyani, in his address said, Fazilka is now known as the city of eye donors and announced the opening of Eye Bank at Fazilka.  He further said that it is easy to say for eye donation but this service is not that easy as the people now shirk taking care of their parents even.

Charandev Singh, ADC said, eye donation is a big service to the society.  A man can donate his eyes before his next birth.  He thinks that the life is for him only but the real life is that if you are helpful to others.

Dr. Asha Goomber on this occasion said, the beautiful eyes are those, which are donate to give light to others after death.

 Raj Kishore Kalra, president, Kanwal Kishore Grover, secretary and Shashi Kant, chairman said, as on date, the society has managed the eye donation of 177 persons on their deaths besides arranging artificial limbs to 198 persons with the help of Bhagwan Mahavir Viklang Samiti, Ambala, Lala Durga Charan Charitable Artificial Limb Centre and Parvati Devi Trust, Ambala.

They further said that the society has also arranged number of social service camps like sugar check-up, education to poor students, regular medicines to poor families, woolen sweaters and organised seminars on social evils.

Padamshree Vijay Chopra in his address said, earlier there was a shortage of eyes but it not now.  The initiative of Social Welfare Society for managing eye donations is appreciable and motivational.  He said, "A man will live even after his death by donation one of his organ".

He further said, most of the social welfare works to be done by the government are being managed by the social organisations.  The government should arrange sufficient power supply, pure drinking water and cheap education. By providing these essential services, the society will prosper and economists of the country must think it over.  The youths should come forward by moving on the footsteps of elders and with the joint working of elders and youths, the society will be benefited.

Monday, October 15, 2012

Thursday, October 11, 2012

नशा न करेंगे तो सड़क पर सुरक्षित रहेंगे : Safe Rickshaw Drive Campaign at Fazilka by Traffic Police, Punjab

जागरण संवाददाता, फाजिल्का : अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आरपी सिंह के आदेशानुसार रिक्शा चालकों को भी ट्रैफिक नियमों के दायरे में शामिल कर लिया गया है। जिसका आगाज मंगलवार को फाजिल्का से किया गया। ट्रैफिक पुलिस की ओर से नवगठित फाजिल्का ईको कैब वेलफेयर सोसायटी के रिक्शा चालकों को रोड सेफ्टी की ट्रेनिंग दी गई। जिसमें 120 रिक्शा चालकों ने भाग लिया। इस मौके पर रिक्शा चालकों को नशे से दूर रहने की अपील की गई। पुलिस के सेमिनार के उपरांत दैनिक जागरण के मिस्टर नशामुक्तएडवोकेट संजीव बांसल ने भी रिक्शा चालकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताया। ट्रैफिक पुलिस के एएसआइ नरिंद्र सिंह ने बताया कि नशा करके वाहन चलाने से करीब 60 प्रतिशत हादसे होते हैं। जिनमें कई मौत हो जाती है और कई घायल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि नशामुक्त नागरिक ही स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है। रिक्शा चलाते समय चालक तंबाकू का सेवन न करें। सवारी इसे पसंद नहीं करती और चालक को इससे नुकसान होता है। नशेड़ी रिक्शा चालकों का प्रभाव स्कूल जा रहे बच्चों पर भी पड़ता है। उन्हांेने कहा कि रिक्शा चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने की बजाय थोड़ी देर रुकना बेहतर रहता है। ट्रैफिक पुलिस के हवालदार जसवंत सिंह व पवन कुमार ने कहा कि चौक को पार करते समय शॉर्टकट की बजाय नियमानुसार चलें। इस मौके पर सोसायटी के मनजिंद्र सिंह, गुरदीप सिंह और राज कुमार आदि मौजूद थे।

Dainik Jagran, Ludhiana Edition, Ferozpur-Fazilka Page 3, 11 October 2012

Wednesday, October 10, 2012

आरटीआइ कार्यकर्ता को जान से मारने की धमकी

जागरण संवाददाता, फाजिल्का : आरटीआइ कार्यकर्ता और अग्रदूत सोशल वेलफेयर सोसायटी के महासचिव अमर चेतीवाल ने एक भाजपा नेता पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

चेतीवाल ने कहा कि उन्होंने विभिन्न विभागों में हो रहे भ्रष्टाचार के बारे में आरटीआइ के तहत सूचना मांगी है। इसी की खुन्नस में सात अक्टूबर को उनके मोबाइल फोन पर किसी ने फोन किया। उक्त व्यक्ति ने अपना नाम राकेश सहगल बताया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी और आरटीआइ के तहत सूचनाएं मांगना बंद करने को कहा। चेतीवाल का आरोप है कि उक्त व्यक्ति भाजपा का नेता है। उन्होंने पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।


नहीं दी धमकी : सहगल

भाजपा नेता राकेश सहगल ने कहा कि उन्होंने फोन जरूर किया था, लेकिन कोई धमकी नहीं दी। उन्होंने कहा कि चेतीवाल भाजपा के जिला महासचिव रहे हैं। एक जिम्मेवार पद पर रहने के बावजूद वह आरटीआइ की आड़ में पार्टी की छवि खराब कर रहे हैं। फोन पर हुई बात में उन्होंने चेतीवाल से आरटीआइ की बजाय सीधे पदाधिकारियों से जवाब मांगने की सलाह दी थी। यहां तक कि उन्होंने चेतीवाल को सूचना मांगने से भी नहीं रोका।


शिकायत मिलते ही कार्रवाई : एसएसपी

अमर चेतीवाल ने खुद को मिली धमकी की शिकायत रजिस्टर्ड डाक से एसएसपी व नगर थाना पुलिस को भेजी है। इस बारे में एसएसपी अमर सिंह ने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। शिकायत मिलते ही बनती कार्रवाई की जाएगी।


सूचना न देने पर ईओ सहित तीन चार्जशीट

फाजिल्का : आरटीआइ कार्यकर्ता अमर चेतीवाल ने नगर परिषद की ओर से खरीदे गए सीवरेज मेनहोल के ढक्कनों, सलेमशाह बाजार में बनाए गए डिवाइडर सहित विभिन्न विकास कार्यो सहित दो दर्जन सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन समय पर न दी गई, आधी-अधूरी व गुमराह करने वाली सूचनाओं के आधार पर चेतीवाल ने प्रदेश सूचना आयुक्त से शिकायत की थीं। उसी के आधार पर प्रदेश सूचना आयुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, एसओ व क्लर्क को चार्जशीट कर दिया है।

Tuesday, October 9, 2012

Term "Act of God" or "Natural Disaster"

This term "Act of God" used by Insurance companies or Authorities needs to be looked upon. In 2001 during Bhuj, Gujrat earthquake in India, more than 20,000 people died and its magnitude at Richter scale was 7.6, now almost at the same time, there was an earthquake in El Salvador (Latin America) with richer scale intensity 7.7 and in that 852 people died, further the one in California with same intensity and in the year 2001 only caused death of about 50 people. So, if I go by the definition of insurance companies by saying these incidents as "Act of God" or "Natural Disaster" , statistically it is proved that God love Latin American people 25 to 100 times more than we Indians. Important here to understand  is that there is nothing called 'Act of God" and everything is man made. With the Development of Science, we understand the behavior of nature very well, but we are not prepared enough to handle that and for that reason we end up blaming god for it. The way we safeguard our houses from Rain, also can be protected for earthquake or tsunamis but dear human beings stop blaming god and act fast. Thanks to the movie "OMG" for starting this though proving debate

Monday, October 8, 2012

Civil Hospital ailing in Fazilka : Health services at the 103-year-old hospital crippled due to shortage of doctors

 Praful Chander Nagpal

Fazilka, October 2
Medical services at the 103-year-old Civil Hospital, formerly known as Dane Hospital, Fazilka, which was established by the British, has been crippled following an acute shortage of specialised doctors and the paramedical staff.

Following the promotion and transfer of specialist doctors two years back, the office of the Civil Surgeon here fell vacant and has not been filled up yet despite Fazilka being a district headquarters.

As per the Senior Medical Officer (SMO), Civil Hospital, Fazilka, Dr SP Garg, out of the total 13 sanctioned posts, eight have been lying vacant for long and a pathologist, Dr Renu Dhuria, has proceeded on long leave.

The sanctioned posts of surgeon, gynaecologist, paediatrician, medical specialist, dermatologist and MBBS doctors are also vacant.

For the last few months, the doctors have been braving all odds to run the emergency services and OPD besides attending to duties like conducting the postmortem, attending the courts and sending the reports on a regular basis to the higher authorities.

The schemes run by the Centre and the state government for the poor sections of society have also been hit adversely due to the shortage of doctors. The aim of the state government-- to perform maximum deliveries at the Civil Hospital-- has also been affected in the absence of a gynaecologist.

It has become difficult for the staff to run the blood bank for want of a Blood Transfusion Officer (BTO).

The operation theatre and the ultrasound machine are virtually lying defunct. The ambitious DOTS project, for treating the tuberculosis patients, has been hit due to the non-availability of a physician. The hospital staff has to refer the seriously ill patients to the medical college at Faridkot for specialised treatment.

As per official sources, the number of patients at the OPD has declined to 200-250 on a working day. Earlier, the figure used to be around 400.

The number of indoor patients has also come down as the physicians, surgeons, heart specialists and the gynaecologists, who used to admit the patients, are presently not serving the hospital, thanks to the indifferent attitude of the state health department.

The patients hover around the OPD which often wears a deserted look even during the working hours. The posts of paramedical staff have also been lying vacant. Out of the total 24 sanctioned posts of nurses, 15 are lying vacant, which in turn, has affected the indoor services also.

"We have sent the report to the higher authorities but the vacant posts are yet to be filled up," said the SMO Dr Garg.